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अनूठी है शिखा शाह की कारीगरी

प्रतिभा पाण्डेय

 सेंट्रल पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड आॅफ इंडिया के फरवरी 2015 के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिदिन 1.4 लाख टन कचरा उत्पन्न होता है। इस कचरे में बहुत सा हिस्सा बोतलों, गत्ते, डिब्बे, प्लास्टिक का सामान, विभिन्न उद्योगों से निकले कबाड़ का भी होता है। शहरों में इन सबके ढेर के ढेर लगे देखना कोई नई बात नहीं है। यह जानते हुए भी कि इस तरह हर दिन इकट्ठा होता कचरा एक दिन हमारे घर के सामने तक पहुंच जाएगा, हम इसमें बढ़ोतरी करते जाते हैं। पर, बनारस की शिखा शाह की परवरिश और शिक्षा कुछ ऐसी हुई कि उन्हें इस बढ़ती समस्या से अनजान बने रहना मंजूर ना हुआ और उन्होंने एक सार्थक पहल की।

स्क्रैपशाला की शुरूआत

 इस तरह शुरू हुआ उनका छोटा सा स्टार्टअप, जिसका नाम रखा गया स्क्रैपशाला। शिखा की राय में लगातार बढ़ते कबाड़ से निजात तभी मिलेगी जब हम उसे कम करने की सोचें। कचरे का दोबारा उपयोग करने के तरीके खोजने होंगे उसे रिसाइकल करना होगा। इसके लिए वह अपने स्टार्टअप के जरिए कोशिश में लगी हैं। उनकी यह अनोखी सोच कई लोगों के लिए प्रेरणा बनी है।

छोड़ दी कमाऊ नौकरी

पर्यावरण विज्ञान से मास्टर्स करने के बाद शिखा को अपने प्रोजेक्ट्स और नौकरियों की वजह से गांवों की समस्याओं के बारे में करीब से जानने का मौका मिला। आईआईटी, मद्रास में अपनी नौकरी के दौरान वह कई छोटे-बड़े उद्यमियों से मिलीं और स्टार्टअप की चुनौतियों को समझने का मौका मिला। वहां से कुछ अपना और सार्थक करने का विचार आया। वह नौकरी छोड़कर अपने शहर बनारस आ गई और स्क्रैपशाला शुरू करने की योजना बनाई। शिखा बताती हैं कि बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को चीजों को रिसाइकल करते देखा था। वह कबाड़ कम से कम निकालने पर जोर देती थीं और कई बार घर के पुराने हो रहे सामान को सजा-धजाकर नया कर देतीं। यह सब शिखा के लिए उनकी स्टार्टअप की प्रेरणा बने और स्क्रैपशाला में अपसाइकलिंग का काम शुरू हुआ।

कम नहीं थी चुनौतियां

शिखा बताती हैं, ‘स्क्रैपशाला के काॅन्सेप्ट को लेकर घर में किसी ने तुरंत हां नहीं की थी। शुरूआत में थोड़ी असहमति थी। लेकिन मां मेरे साथ आई और मेरी सहेली भी और एक बार शुरूआत होने पर सभी का सपोर्ट मिला। पुराने सामान और कचरे को नए रूप में लाना भी आसान काम नहीं होता। उसे साफ करना, डिजाइन करना भी एक चुनौती होती है। कचरे को लेकर वैसे भी लोगों में एक पूर्वधारणा होती है। तैयार सामान को लेकर लोगों में पहले डाउट था। फिर जब प्रोडक्ट्स पसंद किए गए, तो अब सबका सहयोग मिल रहा है।’ चुनौतियां और भी थीं, जैसे जगह, कारीगर और मैटीरियल। मां मधु शाह और सहेली कृति सिंह के साथ शिखा ने अपने घर से शुरूआत की। आज उनके पास पूरी टीम है। अपसाइकलिंग यानी पुरानी चीजों को नया रूप देने के लिए चीजें शुरूआत में उनके घर से ही मिलीं। शिखा बताती हैं कि अब पड़ोसियों, दोस्तों और परिचितों… सबको ध्यान रहता है। शिखा कहती हैं, ‘अब तो लोग कूरियर से भी मुझे चीजें भेज देते हैं। दोस्त कोई बेकार सामान फेंकने से पहले पूछ लेते हैं।’

कई लोगों के लिए गढ़ा रोजगार

शिखा की टीम में आज कई लोग हैं। हालांकि वे खुद भी डिजाइन करती हैं, लेकिन उनकी टीम के कारीगर भी अपने तरीके से इसमें योगदान देते हैं। वे बताती हैं, ‘अब हमारी बड़ी टीम है। इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के भी लोग हैं। उन्हंे यहां एक नियमित आय मिल रही है और सबको अपने ढंग से क्रिएटिव वर्क की पूरी छूट है।’

क्या हैं उत्पाद

आज शिखा की स्क्रैपशाला बनारस ही नहीं, पूरे देश में एक जाना-पहचाना नाम है। यहां पुराने टायर से खूबसूरत फर्नीचर, चाॅकलेट-बिस्किूट के रैपर से बने खूबसूरत बैग्स, शीशे की बोतलों से लैंपशेड्स, प्लास्टिक की बोतलों से गमले, पुरानी केतली का सजावटी रूप और पुराने गत्ते से वाॅल डेकोरेशन के आइटम्स जैसी कई चीजें बनाई जा रही हैं। उनके प्रोडक्ट्स आॅफलाइन और आॅनलाइन उपलब्ध हैं। इसे और आगे ले जाने की योजना है।

घर में करें यूं कबाड़ कम

शिखा बताती हैं कि उनके घर में कचरा ना के बराबर निकलता है। इसके लिए वे कुछ टिप्स देती हैं-

  1. प्लास्टिक की बोतलों में पानी भरने पर अगर गर्मी हो, तो उसमें हानिकारक तत्व बनते हैं। इसलिए, घर में साॅस, शर्बत बगैरह की शीशे की बोतलें खाली हों तो उन्हें साफ करके पानी भरकर फ्रिज में रखें।
  2. घर में टूथब्रश प्लास्टिक के ना लेकर आप लकड़ी के लें। ये मार्केट में उपलब्ध हैं। इससे आपको उन्हें रिसाइकल करने में आसानी होगी।
  3. साबुन, शैंपू वगैरह के रीफिल पैक लेंगी, तो बोतलों का कचरा कम निकलेगा।
  4. गीले कचरे को कंपोस्ट (खाद) बना दें।
  5. कबाड़ को संस्थाओं को दान कर दें। उसे रिसाइकल कैसे करें, इसकी वर्कशाॅप में जाएं।

 

 

 

पेट्रोल 1.2 और डीजल 1.24 रुपये/लीटर सस्ता

नई दिल्ली। इंडियन आॅइल कार्पोरेशन ने पेट्रोल व डीजल के दाम घटा दिए हैं। अब पेट्रोल 1.2 और डीजल 1.24 रुपये लीटर होगा। 16 जून से ही देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रोजाना संशोधन की शुरूआत हो जाएगी। 16 जून, 2017 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रोजाना होने वाले बदलाव को लेकर नियमों को थोड़ा बदल दिया गया है। अब आधी रात के बजाय रोजाना सुबह छह बजे इसकी कीमतों में बदलाव होगा। बुधवार को देर शाम पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान के साथ पेट्रोल पंप डीलरों की बैठक में इस बात पर सहमति बन गई है।
नहीं होगी हड़ताल
पेट्रोल पंप डीलर्स ने 16 जून से प्रस्तावित नो-सेल-नो-पर्चेज की अपनी हड़ताल का फैसला वापस ले लिया है। फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है, क्योंकि सरकार पेट्रोल डीजल की कीमतों में होने वाले बदलाव के समय को रात 11 बजे स बाद सुबह 6 बजे करने पर सहमत हो गई है। इसके अलावा डीलर्स ने सरकार से अपना कमीशन बढ़ाए जाने की भी मांग की थी, जिसको लेकर सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जुलाई से उनका कमीशन बढ़ा दिया जाएगा।

इरडा ने संभाली सहारा इंडिया लाइफ इंश्योरेंस की कमान

नई दिल्ली। सहारा इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का प्रबंधन अब बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी इरडा संभालेगा। इरडा ने सहारा इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का प्रबंधन करने के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया है। नियामक ने कहा कि सुब्रत रॉय की यह कंपनी जिस तरीके से काम कर रही है, वह ग्राहकों के हितों के लिए नुकसादेह है। इरडा ने अपने आदेश में कहा कि नियामक के महाप्रबंधक आर.के. शर्मा को तत्काल प्रभाव से प्रशासक नियुक्त किया गया है। नियामक ने कहा कि उसके पास मानने का यह पर्याप्त आधार है कि कंपनी की गतिविधियां इसके ग्राहकों के हितों के खिलाफ है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के मई महीने में 1.53 करोड़ रुपए की 665 पॉलिसी बेची। बीमा कंपनी ने 2016-17 में 1,6058 ग्राहकों से 44.68 करोड़ रुपए की प्रीमियम जुटाया। इरडा ने अपने बयान में कहा, व्यवस्थापक बीमा अधिनियम, 1938 के तहत लागू प्रावधानों के अनुसार बीमाकर्ता के व्यवसाय के प्रबंधन का संचालन नियामक करेगा। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान अप्रैल-मई माह के बीच 1.53 करोड़ रुपये की 665 पॉलिसी बेची हैं। कंपनी ने साल 2016-17 में 16,058 ग्राहकों से 44.68 करोड़ रुपये का प्रीमियम इकट्ठा किया था। इरडा ने कहा है, प्रशासक बीमा अधिनियम 1938 के तहत लागू होने वाली शक्तियों और कर्तव्यों के तहत कार्य करेगा और कारोबार का बेहतर आर्थिक संगत दक्षता के साथ प्रबंधन करेगा व नियामक को नियमित रिपोर्ट करेगा।

सोने पर लगेगा 3 फीसदी जीएसटी

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में काफी कशमकश के बाद सोने पर 3 फीसदी जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया है। इससे पहले सोने को जीएसटी के 5 पर्सेंट के स्लैब में रखे जाने की चर्चा थी, लेकिन केरल को छोड़कर कोई भी राज्य इस पर सहमत नहीं था। गोल्ड और गोल्ड जूलरी पर 3 पर्सेंट टैक्स लगेगा। डायमंड पर भी 3 पर्सेंट टैक्स लगेगा, जबकि रफ डायमंड पर 0.25 फीसदी जीएसटी लागू होगा। जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग 11 जून को होगी। जीएसटी काउंसिल ने ट्रांजिशन और रिटर्न्स समेत कई नियमों मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में सभी राज्यों के फाइनैंस मिनिस्टर्स ने 1 जुलाई से जीएसटी को लागू किए जाने पर सहमति जताई।

किस पर, कितना टैक्स
टेक्सटाइल्स
कॉटन फैब्रिक/यान:र्जीएसटी के तहत 5% टैक्स लगाया जाएगा। अभी इस पर 0% टैक्स लगता है।
रेडीमेड गारमेंट: इस पर 12% टैक्स लगाया जाएगा। लेकिन, 1000 रुपए से कम के गारमेंट पर 5% जीएसटी लगाया जाएगा।

तेंदू पत्ता/बीड़ी
– अभी इस पर 20% टैक्स लगता है। बीड़ी के पत्ते पर 18% जीएसटी लगेगा। बीड़ी पर 28% टैक्स लगाया जाएगा, इस पर कोई सेस नहीं लगेगा।

बिस्किट
– अभी बिस्किट पर 12% से लेकर 20.5% टैक्स लगता है। जीएसटी के तहत सभी तरह के बिस्किट पर 18% टैक्स लगेगा।

क्या है जीएसटी?
– जीएसटी का मतलब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स है। इसको केंद्र और राज्यों के 17 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स के बदले में लागू किया जाएगा। ये ऐसा टैक्स है, जो देशभर में किसी भी गुड्स या सर्विसेज की मैन्युफैक्चरिंग, बिक्री और इस्तेमाल पर लागू होगा। इससे एक्साइज ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), स्टेट के सेल्स टैक्स यानी वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैंप ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या बिक्री और गुड्स के ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।
बाजार होगा एक समान
सरल शब्दों में कहें तो जीएसटी पूरे देश के लिए इनडायरेक्ट टैक्स है, जो भारत को एक समान बाजार बनाएगा। जीएसटी लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसकी वजह अलग-अलग राज्यों में लगने वाले टैक्स हैं। इसके लागू होने के बाद देश बहुत हद तक सिंगल मार्केट बन जाएगा।

चंदा कोचर को 7.85 करोड़ का पैकेज मिला

नई दिल्ली। देश के सबसे बडे़ प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ चंदा कोचर को बीते वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 7.85 करोड़ रुपए कुल पैकेज मिला।उनके वेतन पैकेज में पिछले साल के मुकाबले करीब 64 फीसदी का इजाफा हुआ है। दैनिक आधार पर गणना की जाए तो उन्होंने 2.18 लाख रुपए प्रतिदिन वेतन मिला।31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान कोचर का मूल वेतन 15 फीसदी बढ़कर 2.67 करोड़ रुपए हो गया। आलोच्य वर्ष के दौरान उन्हें 2.2 करोड़ रुपए होम परफोर्मेस बोनस मिला।कमजोर वित्तीय नतीजों के चलते उन्हें वर्ष 2015-16 के दौरान बोनस नहीं मिला था। उस दौरान उनकी कुल सीटीसी [कॉस्ट टू कंपनी] 4.79 करोड़ रुपए थी। इसमें 2.32 करोड़ रुपए मूल वेतन शामिल था।उनके कुल पैकेज में रिटायरमेंट लाभ भी शामिल हैं। अन्य लाभों में साज-सज्जा युक्त आवास, गैस, बिजली व पानी कनेक्शन, फर्निशिंग, क्लब फीस, ग्रुप इंश्योरेंस, कंपनी कार, आवास पर टेलीफोन, लीव ट्रैवल कंसेशन [एलटीसी] और पीएफ भी शामिल है।

अनाज और दूध पर टैक्स नहीं, एसी-फ्रिज होगा सस्ता

श्रीनगर। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स के तहत अधिकतर वस्तुओं की टैक्स दरों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बन गई है। श्रीनगर में गुरुवार को शुरू हुई दो दिवसीय जीएसटी काउंसिल की बैठक में रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स रेट घटाने का फैसला लिया गया। नए टैक्स सिस्टम के तहत कई जरूरी चीजों की कीमतें कम हो सकती हैं। अनाज और दूध को टैक्स मुक्त कर दिया गया है। प्रोसेस्ड फूड भी सस्ते हो जाएंगे। मिठाई, इडेबल आॅइल, चीनी, चायपत्ती, कॉफी और कोयले को 5% टैक्स स्लैब में रखा गया है। हेयर आॅइल, टूथ पेस्ट और साबुन पर 18 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। अभी इन पर 28 फीसदी टैक्स लगता है। कोयले और मसालों पर भी 5% टैक्स लगेगा। एंटरटेंनमेंट, होटल और रेस्त्रा में खाने पर 18 पर्सेंट टैक्स लगेगा। छोटी कारों पर 28 फीसदी टैक्स के अलावा सेस लगाया जाएगा। लग्जरी कारों पर टैक्स के अलावा 15% सेस जोड़ा जाएगा। एसी और फ्रिज को भी 28 फीसदी टैक्स दायरे में रखा गया है। हालांकि अभी इन पर अभी 30-31 फीसदी टैक्स लगता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां मीडियाकर्मियों से कहा, किसी भी वस्तु पर बढ़ोतरी नहीं की गई है। कई चीजों पर टैक्स की दरें कम हो जाएंगी। विचार यह है कि जीएसटी का असर महंगाई बढ़ाने वाला ना हो। वहीं राजस्व सेक्रेटरी हसमुख अधिया ने रिपोटर्स को बताया कि 1211 आइट्मस में से 7% को छूट के दायरे में रखा गया है। 14% वस्तुओं को 5% के दायरे में रखा गया है। 17% पर 12% टैक्स लगेगा। 43% आइट्मस को 18 पर्सेंट टैक्स लिया जाएगा। अन्य 19% वस्तुओं पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा। सोने और बीड़ी पर टैक्स स्लैब का फैसला शुक्रवार को होगा। सर्विस टैक्स की दरें भी दूसरे दिन ही तय की जाएंगी।

एस.ई.सी.एल ने कमाये 595 करोड़

रायगढ / एस.ई.सी. एल ने पिछले साल से अधिक का लक्ष्य प्राप्त कर 595 करोड़ की आय अर्जित कि हैं ।एस ई सी एल की सभी कोल माइंस ने इस बार रिकार्ड उत्पादन्न प्राप्त किया हैं जो पिछले साल से 27 प्रतिशत अधिक हैं इसी तरह इस साल भी 117.5 एल.टी.ई की बनिस्बत 132.72 एल.टी.ई कोयले का खनन किया गया जो टारगेट से 13 प्रतिशत अधिक हें ।एस ई सी एल ने प्रति दिन 94994 टी ई व महिने में 22.25 एल टी ई का उत्पाद प्राप्त किया हैं ।एस ई सी एल के अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकार व्दारा दिये गये लक्ष्य की प्राप्ति के लिये लग्न व मेहनत से काम किया जिसका अच्छा परिणाम मिला ।जिसका श्रेय पूरे विभाग के साथ साथ जी.एम.को जाता हें जिनके कुशल मार्गदर्शन व प्रेरणा ने स्टाप को उर्जा प्रदान की और सभी उपलब्धियां प्राप्त की जिसके लिये एस ई सी.एल बधाई के पात्र हैं । मई दिवस के अवसर पर कार्यालय व्दारा 1मई को श्रम दिवस मनाया गया जिसमें ध्वजारोहन के बाद कारपोरेट गीत व महाप्रबंधक आर के अमर व्दारा सम्बोधन किया गया व मिठाईयां बाटी गयी।

विशाल सिक्का ने 2016-17 में 43 करोड़ रुपये वेतन लिया

नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की देश की दूसरी बड़ी कंपनी इन्फोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिक्का ने वित्त वर्ष 2016-17 में 66.8 लाख डॉलर यानी करीब 43 करोड़ रुपये वेतन लिया। हालांकि, यह राशि उनके कुल वेतन पैकेज का 61 प्रतिशत है। गौरतलब है कि इन्फोसिस के संस्थापकों ने कंपनी प्रबंधन को लेकर चिंता के जो मुद्दे उठाए हैं उनमें सिक्का का ऊंचा वेतन भी एक मुद्दा रहा है। सिक्का को समाप्त वित्त वर्ष के लिए 1.1 करोड़ डॉलर वेतन देने का वादा किया गया था। इसमें मूल वेतन, वेतन से इतर राशि, प्रतिबंधित शेयर यूनिट और वर्ष के दौरान शेयर विकल्प प्रदर्शन भी शामिल है। बहरहाल 2016-17 में सिक्का ने जो वेतन लिया है वह उन्हें इससे पिछले साल मिले कुल वेतन से भी कम है। पिछले साल सिक्का ने 48.73 करोड़ रुपये का वेतन लिया था। कंपनी के फाइनैंशल स्टेटमेंट के मुताबिक सिक्का को वेतन से इतर सुविधा राशि में 80 लाख डॉलर देने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें इसमें 36.8 लाख डॉलर ही मिले। सिक्का के वेतन को लेकर इन्फोसिस के संस्थापक सदस्य आवाज उठाते रहे हैं।

चीन-अमेरिका के बीच छिड़ सकता है व्यापार युद्ध : जैक मा

बीजिंग। ई-वाणिज्य कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा ने कहा है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच विवादों का उपयुक्त तरीके से समाधान नहीं किया गया तो ट्रंप प्रशासन के अंतर्गत ‘बड़े व्यापार युद्ध’ की आशंका है। उन्होंने कहा कि चीन का आर्थिक परिदृश्य उम्मीद के मुकाबले कहीं अधिक कड़ा होगा जिसकी वजह चीनी अर्थव्यवस्था में निरंतर नरमी है। जनरल एसोसिएशन आॅफ झेजिआंग इंटरप्रेन्योर की सालाना बैठक को संबोधित करते हुए जैक मा ने कहा, अगले तीन से पांच साल में उम्मीद के मुकाबले आर्थिक स्थिति अधिक कठिन होगी। उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि का जिक्र किया। यह दो दशक में सबसे कम वृद्धि दर है। उन्होंने कहा कि यह स्वभाविक है कि चीन की तीव्र आर्थिक वृद्धि दर पिछले तीन दशक में तीव्र रही है और यह हमेश बनी नहीं रह सकती और अब जोर वृद्धि की गुणवत्ता पर स्थानांरित हो गया है।

नोटबंदी सैद्धान्तिक रूप से अच्छा कदम : जालान

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने कहा कि सैद्धान्तिक रूप से देखा जाए तो नोटबंदी कालाधन समाप्त करने के लिए एक अच्छा कदम था लेकिन यदि नतीजों के हिसाब से देखा जाए, तो यह अच्छा साबित नहीं हुआ. एनसीएईआर के एक कार्यक्रम में जालान ने कहा, ‘सैद्धान्तिक रूप से नोटबंदी अच्छी थी, किसी को कालेधन को पकड़े जाने पर आपत्ति नहीं है. लेकिन यदि आप नतीजों को देखें तो आप देख सकते हैं यह कदम सही साबित नहीं हुआ.’ उन्होंने कहा कि यदि इसने ठीक काम नहीं किया है तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इसके स्थान पर क्या कर सकते हैं जो सही साबित हो. बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने नोटबंदी को ‘एक रचनात्मक विध्वंस’ बताया था. उन्होंने इसकी तुलना 1991 के सुधारों से की. उन्होंने कहा कि यह 1991 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा ‘उलटफेर पैदा करने वाला नीतिगत नवप्रवर्तन’ है. इससे कालाधन को नष्ट करने में मदद मिली है. वहीं, नोबेल प्राइज़ विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन नोट बंदी जैसे निर्णय से खुश नहीं दिखे थे. एक अंग्रेजी अखबार के साथ साक्षात्कार में प्रोफेसर सेन ने सरकार के नोट बंदी के इरादे और अमल पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था यह “निरंकुश कार्रवाई” जैसी है और सरकार की “अधिनायकवाद प्रकृति” का खुलासा करती है.