Monthly Archives: March 2017

दलाई लामा के तवांग जाने से डरा चीन

नई दिल्‍ली (जेएनएन)। दलाई लामा का अरुणाचल प्रदेश स्थित तवांग जाना एक बार फिर से चीन के लिए चिंता का विषय बन गया है। दरअसल, वह दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर काफी डरा हुआ है। उसका कहना है कि यह उत्तराधिकारी चीन खुद तय करना चाहता है। चीन के थिंक टैंक लियांग जियांगमिन ने साफतौर पर कहा कि चीन दलाई लामा की जगह किसी अन्‍य उत्तराधिकारी को तिब्‍बत से लाना चाहता है। उनका कहना था कि तिब्‍बत में करीब 60 लाख लोग हैं,  जिनमें से महज 20 लाख ही तिब्‍बत से बाहर रहते हैं। इसलिए चीन दलाई लामा जैसे 14 अन्‍यों को पैदा कर सकता है। चीन के थिंक टैंक का कहना है कि दलाई लामा का तवांग जाना भारत और चीन के रिश्‍तों को खराब कर सकता है। उन्‍होंने इस बाबत एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि तवांग चीन का अधिकार क्षेत्र है। लियांग इंस्टिट्यूट ऑफ कंटेमप्रेरी तिबतन स्‍टडीज एट चाइना तिबतोलॉजी रिसर्च सेंटर के डायरेक्‍टर हैं। उन्‍होंने कहा कि तवांग और तिब्‍बत का वर्षों पुराना नाता रहा है और चीन इस बात को शुरू से ही कहता रहा है कि यह चीन का हिस्‍सा है।अपने दावों में उन्‍होंने कहा कि तवांग में मौजूद प्रसिद्ध तीन मंदिर और मठों का जिक्र इतिहास में भी तवांग से जोड़कर किया जाता रहा है। इतना ही नहीं वर्षों से यहां पर बौद्ध धर्म की शिक्षा लेने के लिए भिक्षु आते रहे हैं। यहां पर स्‍थानीय सरकार की मदद से तवांग श्राइन भी बनाई गई है। यही वजह है कि तवांग चीन का हिस्‍सा है, जिसका चीन हमेशा से ही दावा करता रहा है।

नवाज शरीफ से जून में मुलाकात कर सकते हैं मोदी

नई दिल्ली। इस बात की संभावना पहले ही जताई जा रही थी कि पांच राज्यों के चुनाव के बाद भारत की तरफ से पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर जमीं बर्फ को हटाने की शुरुआत हो सकती है। काम शायद शुरू हो गया है। पहले सिंधु जल समझौते पर वार्ता के लिए सरकारी दल इस्लामाबाद भेजने के बाद अब पीएम नरेंद्र मोदी ने पीएम नवाज शरीफ को पाकिस्तान दिवस पर बधाई देते हुए पत्र लिखा है। ऐसे में कूटनीतिक सर्किल में इस बात की चर्चा गर्म है कि मोदी और शरीफ के बीच जून, 2017 में मुलाकात हो सकती है।जून के दूसरे हफ्ते में अस्ताना (कजाखस्तान) में शंघाई सहयोग संघटन (एससीओ) की बैठक होने वाली है जिसमें भारत व पाकिस्तान के पीएम के शामिल होने के आसार हैं। इस बैठक में ही इन दोनों देशों को एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल किया जाना है। उस समय पीएम मोदी कजाखस्तान के पड़ोसी देश रूस में भारत-रूस के कूटनीतिक रिश्तों के 70 वर्ष पूरा होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेने के जाएंगे। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि ठीक दो वर्ष पहले उफा (रूस) में एससीओ की बैठक में ही मोदी ने शरीफ से पांच मिनट की वार्ता की थी जिससे दोनों देशों के बीच आधिकारिक तौर पर बातचीत को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ था। बहरहाल, पीएम मोदी की तरफ से शरीफ को लिखे गये पत्र को विदेश मंत्रालय ने वैसे तो यह महज एक कूटनीतिक औपचारिकता करार दिया है लेकिन जानकारों का कहना है कि पिछले एक वर्ष से जिस तरह से द्विपक्षीय रिश्तों में खटास घुल रही थी उसे देखते हुए इसकी अपनी अहमियत है। भारत ने नरमी के संकेत फरवरी, 2017 से ही देने शुरु किये हैं। तब विदेश मंत्रालय के तहत आने वाले आईसीसीआर ने लाहौर लिटरेचर फेस्टिवल का सहआयोजन किया। पहली बार आईसीसीआर ने पाकिस्तान में किसी कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस बीच भारत ने विभिन्न जेलों में बंद पाकिस्तान के 31 कैदियों को छोड़ने का भी ऐलान किया। उसके बाद भारतीय सांसदों का एक दल वहां एशियाई सांसदों के वैश्विक कार्यक्रम में हिस्सा भी लिया। इसी हफ्ते भारत व पाक के अधिकारियो के बीच सिंधु जल समझौते पर बातचीत हुई है।

राम सेतु की सच्चाई जानने के लिए होगा अध्ययन

नई दिल्ली। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आइसीएचआर) रामायण में वर्णित राम सेतु की वास्तविकता का पता लगाने के लिए शोध अध्ययन करेगा। इसके लिए वह इस वर्ष अक्टूबर से दो महीने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। अपने अध्ययन में आइसीएचआर पुरातात्विक रूप से यह सुनिश्चित करेगा कि राम सेतु ढांचा मानव निर्मित है या यह कुदरती रूप से बना है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष वाई सुदर्शन रेड्डी ने इस आशय की घोषणा की है। पत्रकारों से उन्होंने कहा, ‘राम सेतु से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना पर हम काम शुरू करने जा रहे हैं। इसकी अवधि अक्टूबर, नवंबर होगी। अध्ययन के दौरान हम यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि राम सेतु मानव निर्मित है अथवा यह किसी प्राकृतिक प्रक्रिया की देन है।’ उनका कहना था कि यह पूरी तरह से आइसीएचआर की परियोजना है, लेकिन जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार से भी मदद ली जाएगी। बकौल रेड्डी, ‘इस शोध अध्ययन परियोजना में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञ, इतिहासकार, शोध छात्र, मरीन विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। अध्ययन में शामिल होने वाले सदस्यों का चयन मई या जून में आयोजित वर्कशाप में किया जाएगा।’ रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण की लंका पर चढ़ाई करने के लिए बंदरों की मदद से राम सेतु का निर्माण कराया था। तमिलनाडु के तटीय इलाके से श्रीलंका तक इस सेतु के अवशेष मिले हैं। आइसीएचआर ने राम सेतु को लेकर अध्ययन करने की यह घोषणा ऐसे समय की है, जब उप्र में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।

 

सीसीआइ ने कोल इंडिया पर लगाया 591 करोड़ का जुर्माना

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) ने सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया पर 591 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। ईधन आपूर्ति समझौतों (एफएसए) में भेदभाव करने वाली शर्तो को रखने के कारण आयोग ने यह कार्रवाई की है। आयोग ने कंपनी को प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार को रोकने के निर्देश देते हुए समझौतों में बदलाव करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश 56 पेज में दिया गया है। इसमें सीसीआइ ने पाया है कि कंपनी बिजली उत्पादकों को नॉन-कोकिंग कोल की आपूर्ति के मामले में अनुचित व भेदभावपूर्ण शर्ते थोपकर प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन कर रही है। आयोग ने यह भी कहा है कि कोल इंडिया ने एफएसए के नियमों और शर्तो को न तो विकसित किया है न ही अंतिम रूप दिया है। इन्हें एकतरफा खरीदारों पर थोप दिया जाता है। पेनाल्टी की 591.01 करोड़ रुपये की राशि 2009-10 से 2011-12 तक की तीन साल की अवधि के कोल इंडिया के औसत टर्नओवर के एक फीसद के बराबर है।यह शिकायतों पर सीसीआइ की ओर से दूसरा आदेश है। पहला आदेश उसने दिसंबर, 2013 में दिया था। तब सीसीआइ ने कोल इंडिया पर 1,773 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसे प्रतिस्पर्धा अपीलीय ट्रिब्यूनल (कॉम्पैट) ने पलट दिया था। साथ ही प्रतिस्पर्धा नियामक से आरोपों की फिर से जांच करने को कहा था। मामले को दोबारा देखने के बाद सीसीआइ ने सार्वजनिक कंपनी पर पेनाल्टी की राशि घटाकर 591 करोड़ रुपये की है।

 

मोदी जी मेरे मन में हैं, रोज करती हूं उनकी पूजा

उज्जैन। देशसेवा का इनाम उनको जनता ने दिया है यूपी में भारी जीत दिला कर। हम दोनों ही देशसेवा में जुटे हुए हैं। मोदी जी मेरे मन में बसते हैं। रोज ईश्वर की तरह उनकी पूजा करती हूं। सरेआम पीएम मोदी के बारे में यह सब कह कर जसोदा बेन ने सभी को चौंका दिया। यूपी में भाजपा की बंपर जीत पर कई लोगों ने बहुत कुछ बोला। पर, इस महिला का बोलना वाकई मायने रखता है। बात हो रही है पीएम मोदी की पत्नी जशोदा बेन की। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह सब कहा। वे यहां सर्किट हाउस में रुकी थीं। वे देवास और उज्जैन के संक्षिप्त दौरे पर आई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनेगा और विश्व में अव्वल स्थान ग्रहण करेगा। वे और मैं दोनों ही देशसेवा में जुटे हुए हैं। मैं शिक्षक हूं और बच्चों को राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार कर रही हूं। इससे पहले रविवार शाम में वे क्षत्रिय समुदाय के मदनमोहन मंदिर की पूजा में शरीक हुईं। देवास में भी एक कार्यक्रम में वे शामिल हुईं। वहां रविवार को आयोजित परिचय सम्मेलन में जशोदा बेन ने बेटियों की शिक्षा के महत्व के बारे में बताया। लोगों का आह्वान किया की बेटियों को शिक्षित बनाएंगे तो देश आगे बढ़ेगा।सोमवार को वह उज्जैन महाकाल के दरबार में पहुंची और आरती में शरीक हुर्इं।

पीएमओ की देखरेख में काम करेगी योगी सरकार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में नई सरकार के गठन के पहले से ही पीएमओ एक्टिव हो गया था। दिल्ली से लगातार लखनऊ फोन जा रहे थे और इसके बीच में तमाम अधिकारियों को समय पर दफ्तर आने और ईमानदारी से काम करने का आदेश भी जारी हो गया। अब सीएम की गद्दी योगी आदित्यनाथ के संभाल लेने के बाद दिल्ली और लखनऊ के पावर सेंटर के बीच एक नया लिंक बनाने की बात सामने आई है। योगी सरकार को सीधे पीएमओ से निर्देश मिलेगा। नृपेंद्र मिश्र जैसे वरिष्ठ अधिकारी को इस काम में लगाने का मतलब ये है कि योगी सरकार को पीएम के यूपी प्लान को आगे बढ़ाना होगा। उसका रोडमैप दिल्ली में तय होगा और योगी सरकार उसे लागू करेगी।
भरोसेमंद अफसर को पीएम ने सौंपी जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार नृपेंद्र मिश्र को यूपी में नई सरकार के गठन और पांव जमाने तक राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखने के लिए लगाया गया है। पीएम मोदी ने ये काम अपने सबसे खास अधिकारी पीएमओ में प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्र को सौंपा है। नृपेंद्र मिश्र पिछले दो दिनों से लखनऊ में हैं। वे योगी सरकार और पीएम के बीच कड़ी का काम करेंगे। नृपेंद्र मिश्र यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच समन्वय का काम देखेंगे।

क्यों अहम हैं नृपेंद्र मिश्र
नृपेंद्र मिश्र यूपी कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने उन्हें अपना प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया। इसका मतलब है कि यूपी में अधिकारियों की तैनाती में उनका अहम रोल रहेगा। सूत्रों के अनुसार योगी और नृपेंद्र मिश्र के बीच योजनाओं को लागू करने को लेकर चर्चा हुई। इस पर भी बात हुई कि कैसे इन योजनाओं का लाभ गरीब लोगों तक सीधे पहुंचाया जा सके।

अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं

नई दिल्ली। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में हाल के दिनों में भारतीयों पर हुए हमले ‘हेट क्राइम’ हैं न कि कानून-व्यवस्था के सामान्य मामले। इतना ही नहीं, सरकार ने जोर देकर कहा है कि अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। सोमवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में कहा कि उन्हें भरोसा है कि ट्रंप प्रशासन इन घटनाओं को ट्रेंड का हिस्सा नहीं बनने देगा और इन पर करीबी नजर रखेगा। विदेश मंत्री ने कहा, ‘हम इन वारदातों को कानून-व्यवस्था का मसला नहीं मानते। यह इतना सामान्य नहीं है। हमारी तरफ से यही कहा जा रहा है कि ये घटनाएं 100 प्रतिशत हेट क्राइम हैं।’ उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की जांच इसी नजरिए से की जानी चाहिेए। विदेश मंत्री अमेरिका में भारतीयों पर हमले की 3 वारदातों पर सदन में बयान दे रही थीं।
अमेरिका में बसे भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में आश्वासन दिया कि भारतीयों पर हुए हमलों की घटनाओं को अमेरिकी प्रशासन के सामने अलग-अलग स्तरों पर उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में चल रही जांच पर सरकार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्री ने कहा ‘मैं इस सदन और सदस्यों को आश्वस्त करना चाहूंगी कि विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा और संरक्षा हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

जाकिर नाइक की 18 करोड़ की संपत्ति जब्त

नई दिल्ली। विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के खिलाफ सोमवार को बड़ा ऐक्शन लिया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) और अन्य की 18.37 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। उधर, एनआईए ने जाकिर नाइक को दूसरा नोटिस जारी कर आतंक रोधी कानून के तहत उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में 30 मार्च तक पेश होने को कहा है। इससे पहले ईडी ने जाकिर नाइक और IRF से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में पिछले महीने उनके एक साथी को गिरफ्तार भी किया था। ईडी को जाकिर नाइक की भी तलाश है जो गिरफ्तारी से बचने के लिए सऊदी अरब में हैं। ईडी ने इसी महीने जाकिर नाईक की बहन नइलाह नौशाद नूरानी से भी पूछताछ की है। ऐसा माना जाता है कि नइलाह जाकिर की 5 कागजी कंपनियों में निदेशक थीं। नइलाह नौशाद नूरानी से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी पूछताछ कर चुकी है। ये पांचों ‘शैल’ कंपनियां नाइक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के लिए मनी लॉन्ड्रिंग के कथित आरोप से जुड़ी हुई हैं। ईडी ने अपनी जांच में साबित किया था कि जाकिर नाइक और उसके एनजीओ ने करीब 200 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है। इसमें से 50 करोड़ रुपये नइलाह के बैंक खातों में जमा किए गए हैं।

मधेशी मोर्चे ने प्रचंड सरकार से समर्थन वापस लिया

काठमांडू। मधेशी पार्टियों के गठबंधन ने प्रधानमंत्री प्रचंड नीत नेपाल सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। मधेशी मोर्चा ने सात दिनों की चेतावनी दी थी। यह समय सीमा मंगलवार को समाप्त हो गई। मोर्चा की मांगों में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराना भी शामिल था। अभी भी 601 सदस्यीय संसद में सरकार को 320 सदस्यों का समर्थन हासिल है। मोर्चा ने मई में स्थानीय निकायों का चुनाव कराने की घोषणा वापस लेने को कहा था। राष्ट्रीय मधेश सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव केशव झा ने कहा, ‘समर्थन की समय सीमा मंगलवार को खत्म हो गई। चेतावनी के बाद भी सरकार ने हमारे नेताओं के साथ बातचीत नहीं की।’ मोर्चा ने सरकार से समर्थन लेने की चेतावनी दी थी। उनकी चिंताओं का समाधान किए बगैर ही सरकार स्थानीय निकायों के चुनाव की तैयारियों में जुट गई। नेपाल में भारतीय मूल के मधेशी समुदाय की आबादी करीब 52 फीसदी है। संविधान के कई प्रावधानों के खिलाफ यह समुदाय संशोधन की मांग कर रहा है। संविधान लागू होने के बाद समुदाय ने छह माह तक विरोध प्रदर्शन किया था।

एनएसजी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को ट्रंप का साथ

वाशिंगटन। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानी एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत पिछले कई सालों के प्रयासरत है। इस मामले में भारत को अमेरिका का भी साथ मिलता रहा है, डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार इस तरफ कुछ हलचल दिखी है। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि ट्रंप प्रशासन में भी भारत की एनएसजी सदस्यता के मामले को लेकर कोई बदलाव नहीं दिखा है। अमेरिका ने बुधवार को कहा कि वह भारत के इस समूह में सदस्यता का समर्थन करता है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने बुधवार को समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, ‘अमेरिका एनएसजी में भारत की सदस्यता का पूरी तरह से समर्थन करता है, और हमें विश्वास है कि भारत इसके लिए तैयार है।’ प्रवक्ता 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता के सवाल पर जवाब दे रहे थे। भारत और अमेरिका इस मुद्दे पर बुश प्रशासन के वक्त से ही काम कर रहे हैं। ओबामा प्रशासन ने भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह में शामिल कराने की भरसक कोशिश की, लेकिन चीन व कुछ अन्य देशों के अडंगे के चलते यह मुहिम परवान नहीं चढ़ पायी। अब यह जिम्मेदारी ट्रंप प्रशासन के हिस्से आयी है। अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा, हमने भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए अपने भारतीय साथियों के साथ इस मुद्दे पर लगातार काम किया है और कर भी रहे हैं। इस तरह से कहा जा सकता है कि ट्रंप प्रशासन में भी भारत की एनएसजी सदस्यता को लेकर कोई बदलाव नहीं आया है। एनएसजी सदस्यता को लेकर भारत की संभावनाओं की कुंजी अब चीन के हाथ में है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इस हफ्ते चीन यात्रा पर जा रहे अमेरिका के नए विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन चीनी नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाएंगे या राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की तरह डोनाल्ड ट्रंप खुद ही इस मामले की कमान अपने हाथ में रखेंगे।