Daily Archives: May 13, 2017

रायपुर को स्वच्छ बनाने महापौर ने शुरू की ‘सफाई गिरी’

रायपुर। रायपुर शहर को स्वच्छ बनाने की पहल की शुरूआत निगम के महापौर प्रमोद दुबे ने सफाई गिरी करके की। इस मौके पर आयुक्त रजत बंसल सहित डप्ब् सदस्य अनवर हुसैन, जसबीर ढिल्लन, राधेश्याम विभार, नागभूषण राव, समीर अख्तर, सतनाम सिंह पनाग, ऐजाज ढबेर, राकेश धोतरे, निशा देवेन्द्र यादव, अजीत कुकरेजा, जोन अध्यक्ष डॉ.अन्नु साहु, सोमन लाल ठाकुर, राजेश ठाकुर, दीपक कृपलानी, हेमलता भागवत साहु, प्रिती तरूण श्रीवास संहित सैकड़ों आम नागरिक मौजूद रहे। लोगों ने पार्षद मिलींद गौतम के गुरू गोविंद सिंह वार्ड से मोर रायपुर सुन्दर रायपुर बनाने हेतु सफाई गिरी शुरूआत की। इसमें शहर जिला अध्यक्ष विकास उपाध्याय पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, सुनिता शर्मा, शहर अध्यक्ष अमित शर्मा, सायरा खान, सायरा बानो, पूर्व पार्षद चंद्रा बेहरा, कुंती बेहरा, ने सफाई गिरी को जागरूकता का एक प्रमुख अभियान बताया साथ ही पांम्लेट के माध्यम से जीरो गारबेज किये जाने का भी लक्ष्य रखा महापौर प्रमोद दुबे ने कहा है कि हमने पिछले साल की तुलना में रैंकिंग में 68 से 38 नं. पर है लेकिन 10 के अंदर आने के लिए इसे अभी से बड़े अभियान के रूप में स्वच्छता कार्यक्रम चलाकर रोको-टोको अभियान के तहत वार्ड के लोगों को शपथ दिलाई गई कि कचरा नाली में डालने से अब रोकना है तथा निर्धारित स्थान पर ही डालने हेतु टोकना है नाली सफाई के लिए लोंगों से अपील भी की गई है कि आज जनता अगर नाली में कचरा तथा अपने निमार्णाधीन भवन के सामग्री को रोक लें तो हम काफी ठीक स्थिति में पहुच जाऐंगे।

महिला स्व-सहायता समुह की महिलाओं को जोड़कर स्वच्छता अभियान शुरू करने का निर्णय की इस वार्ड में लिया गया। संसाधन में बढ़ोतरी करते हुए 6 बकेट वाले 2 रिक्शा की अतिरिक्त स्विकृति प्रदान की गई साथ ही नाली के रिपेयरिंग में जितनी राशि लगेगी उतना पैसा स्विकृत किया जाएगा। छोटे बच्चे तक इस अभियान में घर से निकल कर सहयोग कर रहे थे। आने वाले दिनों में रायपुर शहर को खुले में शौच-मुक्त शहर बनाने में तेजी से जागरूकता अभियान चलाये जाने का निर्णय लिया गया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवकों को मिला सेना में भर्ती का मौका

–राजधानी में 7 और 9 जून को आयोजित होगी रैली
रायपुर। वायुसेना ने छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी पहल करते हुए नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए विशेष अवसर देने की योजना तैयार की है। इसके तहत राजधानी में 7 और 9 जून को भारतीय वायु सेना द्वारा बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में भर्ती रैली का आयोजन करेगी। इस रैली में राज्य के 15 जिलों दंतेवाड़ा, बस्तर, रायगढ़, दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, नारायणपुर, गरियाबंद और बालोद के युवक शामिल हो सकेंगे। यह रैली वायु सैनिक चयन केन्द्र भोपाल द्वारा आयोजित की जाएगी। शुक्रवार की शाम कलेक्टर ओपी चौधरी के साथ विंग कमांडर इमरान खान ने इस बात की जानकारी पत्रकारों को दी।

छत्तीसगढ़ कोटा रह जाता था खाली
कलेक्टर ओपी चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के युवा वायुसेना भर्ती रैली में शामिल होने को जागरूक नहीं थे। ऐसे में इस राज्य के कोटे में दूसरे राज्य के युवाओं की भर्ती हो जाया करती थी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस बात की जानकारी मिलने पर विशेष कोशिश करके वायुसेना भर्ती रैली के आयोजन कराये जाने की पहल की है।

वर्ष में दो बार भर्ती रैली होगी
वायु सैनिक भर्ती केन्द्र भोपाल के विंग कमांडर इमरान खान ने बताया कि इस बार एक साल के भीतर छत्तीसगढ़ में दो बार वायु सेना भर्ती रैली का आयोजन होगा। पहला आयोजन 7 और 9 जून को रायपुर में होगा। दूसरा आयोजन अंबिकापुर में होना प्रस्तावित है।

इन जिलों के युवकों को मिलेगा मौका
दंतेवाड़ा, बस्तर, रायगढ़, दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, नारायणपुर, गरियाबंद और बालोद।

अमिताभ बच्चन बने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सद्भावना दूत

नई दिल्ली। दुनियाभर में मशहूर बॉलिवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन शुक्रवार को दक्षिणपूर्व एशिया क्षेत्र में हेपेटाइटिस जागरूकता कार्यक्रम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सद्भावना दूत नियुक्त किये गए। अमिताभ हेपेटाइटिस की रोकथाम के संबंध में लोगों को जागरूक करेंगे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि किसी को भी इस बीमारी से पीड़ित नहीं होना चाहिए। अमिताभ खुद हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित रह चुके हैं और इसे मात दे चुके हैं। डब्ल्यूएचओ ने अपने बयान में बताया है कि दिग्गज अभिनेता को हेपेटाइटिस महामारी के संबंध में लोगों को तेजी से ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए शामिल किया गया है। अमिताभ ने कहा, मैं हेपेटाइटिस के रोकथाम से संंबधित कामों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं, क्योंकि मैं भी हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित रहा हूं और मैं इससे होने वाली दर्द व तकलीफ को बखूबी जानता हूं। मेरी यही कामना है कि कोई कभी भी वायरल हेपेटाइटिस से पीड़ित न हो।
कार्यक्रम को अपनी आवाज और समर्थन देंगे
सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम को अभिनेता अपनी आवाज और समर्थन देंगे, जिसका मकसद रोग निवारक उपायों को बढ़ावा देना और बीमारी के बोझ को कम करने के लिए शुरू में ही वायरल हेपेटाइटिस के इलाज के लिए प्रोत्साहित करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने अमिताभ के जुड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि इस जुड़ाव व सहयोग से बड़ी संख्या में इस बीमारी से होने वाली समयपूर्व मौतों और वायरल हेपेटाइटिस की बीमारी में कमी लाने के लिए डब्ल्यूएचओ के प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नड्डा ने जताई प्रसन्न्ता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अपने एक विडियो संदेश में कहा, श्रीमान बच्चन की आवाज एक ऐसी आवाज है जो देश भर में लोगों द्वारा संस्कृति, सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि से परे सुनी जाती है और बदलाव को वास्तव में संभव कर सकती है। हमने यह पोलियो उन्मूलन के संबंध में देखा है। अमिताभ इससे पहले भारत में पोलियो उन्मूलन अभियान के लिए यूनीसेफ के सद्भावना दूत के रूप में काम कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन से मिले परम आलय

रायपुर। सन टू ह्यूमन ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा मनुष्य मिलन साधना शिविर का आयोजन साइन्स कॉलेज ग्राउंड मे 5 मई से चल रहा है। शिविर में परम आलय लोगो को जिंदा आहार , जिंदा नाभि एवं जिंदा ध्यान के बारे मे जानकारी दे रहे हैं और लोगो मे स्वयं के प्रति चेतना जगा रहे हैं। इसी सदर्भ में परम आलय शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने परम आलय से छत्तीसगढ़ के युवाओं को कैसे विकसित किया जाये, इस बारे मे चर्चा की। परम आलय के साथ आयोजन समिति लीलाधर सुभाष सिंघानिया मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट के सुबोध सिंघानिया, कैलाश बजाज, योगेश अग्रवाल और गोविंद अग्रवाल भी मौजूद रहे।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने सीमेंट मूल्य वृद्धि का किया विरोध

रायपुर। सीमेंट मूल्य की वृद्धि को लेकर लोगों में आक्रोश है। सीमेंट की कीमत 200 से सीधे 270 रू. कर दी गई है। जिस वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मूल्य वृद्धि को वापस लिये जाने की मांग को लेकर युवा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे.) के कार्यकताओं ने शनिवार को राजधानी में प्रदर्शन किया। युवा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी ने बताया कि सीमेंट मूल्य वृद्धि के विरोध में युवा जनता कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दोपहर में ठेले में सीमेंट की बोरियां लेकर, हाथों में कीमत कम करने की मांग लिखी तखतियां लेकर कटोरा तालाब से उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल के घर की तरफ कूच किया। कबीर चौक के पास पुलिस द्वारा बैरीकेट लगा रास्ता बंद कर रखा था। कार्यकर्ताओं को वहां बलपूर्वक रोक लिया गया। कार्यकर्ताओं की मांग थी कि ये सीमेंट की बोरी उद्योग मंत्री को भेट की जायेगी व मूल्य वृद्धि कम करने की मांग की जायेगी। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संदीप यदु, समीर चौहान, सैयद उमैर, दीपक जायसवाल, विनोद चौहान, कुतुबुतद्दीन कपासी, रामचक्रधारी, रोबिन एनथोनी, शब्बीर, कृतिका पाण्डे, देवराज, शेख वहाज, शद्दाम, विक्की रात्रे, बिज्जू बंजारे, चिकु तिवारी, भुपेन्द्र साहू, विक्की वाधवानी, अभिनव पाठक, चिराग शर्मा, मनोज, शुभम शर्मा, देवराज नारंग, दीपक कुलश्रेष्ठ आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलेगी पीएसयू सेक्टर में नौकरी

रायपुर। राज्य के खिलाड़ियों को अब नौकरी के लिए इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया है। यहां के खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ में काम कर रहे पीएसयू सेक्टर में नौकरी मिलेगी। इस मामले पर ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अफसरों को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। ओलंपिक एसोसिएशन की वार्षिक बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में संचालित सेल, एनएमडीसी, एसईसीएल, एनटीपीसी में खिलाड़ियों का कोटा रखा जायेगा। इस मामले में केंद्रीय खेल मंत्री से भी बातचीत की जायेगी।
संजय कार्यवाहक महासचिव बने
संजय मिश्रा को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन का महासचिव पद बलदेव भाटिया के इस्तीफा देने के बाद खाली हुआ था। वहीं उपाध्यक्ष विजय शाह ने भी इस्तीफा दे दिया है। दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे पर वार्षिक सम्मेलन में चर्चा हुई। दोनों का इस्तीफा फिलहाल विचाराधीन रखा गया है। वहीं उनके स्थान पर संयुक्त सचिव संजय मिश्रा को प्रभार दिया गया है।
2019 के राष्ट्रीय गेम्स पर चर्चा
छत्तीसगढ़ टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिसोदिया के मुताबिक बैठक में 2019 में होने वाले नेशनल गेम की तैयारी अभी से शुरू करने के निर्देश दिए हैं। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर सभी स्टेडियम को दुरुस्त करने के भी निर्देश दिए गए है। जिन खेलों में पदक की उम्मीद हैं उन्हें बढ़ावा देने के निर्देश दिये हैं। विक्रम सिसोदिया के मुताबिक छोटे खेल संघों को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी खेल विभाग को दिये गये हैं।

सुकमा शहीदों के परिजनों को मुंबई में फ्लैग देंगे विवेक ओबेरॉय

रायपुर। सितारों के देशभक्ति के जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। अभिनेता अक्षय कुमार के बाद अब बॉलिवुड ऐक्टर विवेक ओबरॉय ने भी शहीदों के परिवार की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। विवेक 25 शहीद सीआरपीएफ जवानों के परिवार को महाराष्ट्र के ठाणे में एक-एक फ्लैट देंगे। रिपोर्ट की मानें तो विवेक की कंपनी कर्म इंफ्रास्ट्रकचर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से इन सीआरपीएफ शहीदों के परिवार को 25 फ्लैट देने की घोषणा की गई है। खबर है कि चार फ्लैट उन परिवारों को दिए भी जा चुके हैं। आॅर्गनाइजेशन ने उन परिवार की लिस्ट जारी की है, जिन्हें फ्लैट दिए गए हैं और फ्लैट पानेवाली बाकी फैमिली की लिस्ट भी जल्द जारी की जाएगी। हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को निशाना बनाया था, जिसमें जवान शहीद हो गए थे। सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र के बुर्कापाल में घने जंगलों में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया। दरअसल उन्हें भेज्जी क्षेत्र में बन रहे इंजरम भेज्जी मार्ग की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के दल को रवाना किया गया था।

रायगढ़ में किसानों ने निकाली लुंगी रैली

–मुआवजा न मिलने से परेशान है विस्थापित परिवार के लोग
रायगढ़। नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन के रवैये के प्रति किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। एनटीपीसी के रवैये से प्रभावित विस्थापित किसानों ने शनिवार को रायगढ़ में लुंगी पहनकर रैली निकाली। नाराज किसानों ने तेज धूप में सिर्फ लुंगी पहनकर रायगढ़ शहर लंबी श्रंखला बनाई। पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर लुंगी रैली निकाल रहे करीब 300 से ज्यादा किसानों को गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि रायगढ़ जिले के कई किसान लंबे समय से एनटीपीसी पर उनके हितों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि एनटीपीसी के कारण जमीन जाने के बाद उनके पास कुछ भी नहीं है। अभी तक मुआवजा भी नहीं दिया गया। बीते साल एनटीपीसी से ही प्रभावित छह किसानों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की थी।
मुख्यमंत्री रविवार को करेंगे समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह रविवार को रायगढ़ के अधिकारियों के कामों की समीक्षा करेंगे। यहां के बासिंदों के जेहन में सवाल है कि मेडिकल कालेज कब पूर्ण होगा। बिना प्रोफेसरों के कॉलेज, बिना मास्टर के स्कूल, केलो डेम बेकार पड़ा है। कालेजो के भवन जर्जर अवस्था में हैं। जनदर्शनों, लोक सुराजो में शिकायत और आवेदन लेकर भटकते लोगों की क्या कोई सुनेगा और उन्हें न्याया दिला सकेगा। शायद मुख्यमंत्री तक यह बात पहुंचे और लोगों की समस्या का समाधान हो सके।

जब-जब राम ने जन्म लिया तब-तब पाया वनवास!

– डाॅ. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक,
सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ
राम ने बचपन में ही प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया और उन्होंने अपने शरीर के पिता राजा दशरथ के वचन को निभाने के लिए हँसते हुए 14 वर्षो तक वनवास का दुःख झेला। लंका के राजा रावण ने अपने अमर्यादित व्यवहार से धरती पर आतंक फैला रखा था। राम ने रावण को मारकर धरती पर मर्यादाओं से भरे ईश्वरीय समाज की स्थापना की। कृष्ण के जन्म के पहले ही उनके मामा कंस ने उनके माता-पिता को जेल में डाल दिया था। राजा कंस ने उनके सात भाईयों को पैदा होते ही मार दिया। कंस के घोर अन्याय का कृष्ण को बचपन से ही सामना करना पड़ा। कृष्ण ने बचपन में ही ईश्वर की इच्व्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया और उनमें अपार ईश्वरीय ज्ञान व ईश्वरीय शक्ति आ गई और उन्होंने बाल्यावस्था में ही कंस का अंत किया। इसके साथ ही उन्होंने कौरवों के अन्याय को खत्म करके धरती पर न्याय की स्थापना के लिए महाभारत के युद्ध की रचना की। बचपन से लेकर ही कृष्ण का सारा जीवन संघर्षमय रहा किन्तु धरती और आकाश की कोई भी शक्ति उन्हें प्रभु के कार्य के रूप में धरती पर न्याय आधारित साम्राज्य स्थापित करने से नहीं रोक सकी। बुद्ध ने मानवता की मुक्ति तथा ईश्वरीय प्रकाश का मार्ग ढूंढ़ने के लिए राजसी भोगविलास त्याग दिया और अनेक प्रकार के शारीरिक कष्ट झेले। अंगुलिमाल जैसे दुष्टों ने अनेक तरह से उन्हें यातनायें पहुँचाई किन्तु धरती और आकाश की कोई भी शक्ति उन्हें दिव्य मार्ग की ओर चलने से रोक नहीं पायी। ईशु को जब सूली दी जा रही थी तब वे परमपिता परमात्मा से प्रार्थना कर रहे थे – हे परमात्मा! तू इन्हें माफ कर दे जो मुझे सूली दे रहे हैं क्योंकि ये अज्ञानी हैं अपराधी नहीं। ईशु ने छोटी उम्र में ही प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया था फिर धरती और आकाश की कोई शक्ति उन्हें प्रभु का कार्य करने से रोक नहीं सकी। जिन लोगों ने ईशु को सूली पर चढ़ाया देखते ही देखते उनके कठोर हृदय पिघल गये। सभी रो-रोकर अफसोस करने लगे कि हमने अपने रक्षक को क्यों मार डाला? मोहम्मद साहब की प्रभु की इच्छा और आज्ञा को पहचानते हुए मूर्ति पूजा छोड़कर एक ईश्वर की उपासना की बात करने तथा अल्लाह की इच्छा तथा आज्ञा की राह पर चलने के कारण मोहम्मद साहब को मक्का में अपने नाते-रिश्तेदारों, मित्रों तथा दुष्टों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा और वे 13 वर्षों तक मक्का में मौत के साये में जिऐ। जब वे 13 वर्ष के बाद मदीने चले गये तब भी उन्हें मारने के लिए कातिलों ने मदीने तक उनका पीछा किया। मोहम्मद साहब की पवित्र आत्मा में अल्लाह (परमात्मा) के दिव्य साम्राज्य से कुरान की आयतें 23 वर्षों तक एक-एक करके नाजिल हुई। नानक को ईश्वर एक है तथा ईश्वर की दृष्टि में सारे मनुष्य एक समान हैं, के दिव्य प्रेम से ओतप्रोत सन्देश देने के कारण उन्हें रूढ़िवादिता से ग्रस्त कई बादशाहों, पण्डितों और मुल्लाओं का कड़ा विरोध सहना पड़ा। नानक ने प्रभु की इच्छा और आज्ञा को पहचान लिया था उन्होंने जगह-जगह घूमकर तत्कालीन अंधविश्वासों, पाखण्डों आदि का जमकर विरोध किया। बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह को प्रभु का कार्य करने के कारण 40 वर्षों तक जेल में असहनीय कष्ट सहने पड़ें। जेल में उनके गले में लोहे की मोटी जंजीर डाली गई तथा उन्हें अनेक प्रकार की कठोर यातनायें दी र्गइं। जेल में ही बहाउल्लाह की आत्मा में प्रभु का प्रकाश आया। बहाउल्लाह की सीख है कि परिवार में पति-पत्नी, पिता-पुत्र, माता-पिता, भाई-बहिन सभी परिवारजनों के हृदय मिलकर एक हो जाये तो परिवार में स्वर्ग उतर आयेगा। इसी प्रकार सारे संसार में सभी के हृदय एक हो जाँये तो सारा संसार स्वर्ग समान बन जायेगा। अर्जुन को कृष्ण के मुँह से निकले परमात्मा के पवित्र गीता के सन्देश से ज्ञान हुआ कि ‘कर्तव्य ही धर्म है’। न्याय के लिए युद्ध करना ही उसका परम कर्तव्य है। फिर अर्जुन ने अन्याय के पक्ष में खड़े अपने ही कुल के सभी अन्यायी योद्धाओं तथा 11 अक्षौहणी सेना का महाभारत युद्ध करके विनाश किया। इस प्रकार अर्जुन ने धरती पर प्रभु का कार्य करते हुए धरती पर न्याय के साम्राज्य की स्थापना की। माता देवकी ने अपनी आंखों के सामने एक-एक करके अपने सात नवजात शिशुओं की हत्या अपने सगे भाई कंस के हाथों होते देखी और अपनी इस हृदयविदारक पीड़ा को प्रभु कृपा की आस में चुपचाप सहन करती रही। देवकी ने अत्यन्त धैर्यपूर्वक अपने आंठवे पुत्र कृष्ण के अपनी कोख से उत्पन्न होने की प्रतीक्षा की ताकि मानव उद्धारक कृष्ण का इस धरती पर अवतरण हो सके तथा वह धरती को अपने भाई कंस जैसे महापापी के आतंक से मुक्त करा सके तथा धरती पर न्याय आधारित ईश्वरीय साम्राज्य की स्थापना हो।  मीराबाई कृष्ण भक्ति में भजन गाते हुए मग्न होकर नाचने-गाने लगती थी जो कि उनके राज परिवार को अच्छा नहीं लगता था। इससे नाराज होकर मीरा को राज परिवार ने तरह-तरह से डराया तथा धमकाया। उनके पति राणाजी ने कहा कि तू मेरी पत्नी होकर कृष्ण का नाम लेती है। मैं तुझे जहर देकर जान से मार दूँगा। मीरा ने प्रभु की इच्छा और आज्ञा को पहचान लिया था उन्होंने अपने पति से कहा कि पतिदेव यह शरीर तो विवाह होने के साथ ही मैं आपको दे चुकी हूँ, आप इस शरीर के साथ जो चाहे सो करें, किन्तु आत्मा तो प्रभु की है, उसे यदि आपको देना भी चाँहू तो कैसे दे सकती हूँ? यह संसार का कितना बड़ा अजूबा है कि असुर प्रवृत्ति के तथा ईश्वर के घोर विरोधी दुष्ट राजा हिरण्यकश्यप के घर में ईश्वर भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ। उसके दुष्ट पिता ने प्रहलाद को पहाड़ से गिराकर, जहर देकर तथा आग में जलाकर तरह-तरह से मारने का प्रयास किया। प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकष्यप से कहा कि पिताश्री यह शरीर आपका है इसका आप जो चाहे सो करें, किन्तु आत्मा तो परमात्मा की है। इसे आपको देना भी चाहूँ तो कैसे दे सकता हूँ? प्रहलाद के चिन्तन में भगवान आ गये तो हिरण्यकश्यप जैसे ताकतवर राजा का अंत नृसिंह अवतार के द्वारा हो गया। हनुमान जी ने परमात्मा की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया और उनके चिन्तन में भगवान आ गये तो वह एक छलाँग में मीलों लम्बा समुद्र लांघकर सोने की लंका पहुँच गये। हनुमान में यह ताकत परमात्मा की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लेने से आ गयी। प्रभु भक्त हनुमान ने पूरी लंका में आग लगाकर रावण को सचेत किया। हनुमान के चिन्तन में केवल एक ही बात थी कि प्रभु का कार्य किये बिना मुझे एक क्षण के लिए भी विश्राम नहीं करना है। हनुमान ने बढ़-चढकर प्रभु राम के कार्य किये। हनुमानजी की प्रभु भक्ति यह संदेश देती है कि उनका जन्म ही परमात्मा के कार्य के लिए हुआ था। गाँधीजी ने जीवन-पर्यन्त प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान कर प्रभु का कार्य करते हुए सारे समाज की सेवा की। गाँधी जी ने अनेक यातनायें धैर्यपूर्वक सहन की तथा अपनी सेवा भावना तथा सत्य एवं अहिंसा के बल पर देश को आजाद कराया। मदर टेरेसा अपनी दया, करूणा तथा संवेदना से ओतप्रोत महान सेवा कार्यों के कारण सारे संसार में सदा-सदा के लिए अमर हो गई। वह सारे जगत् की करूणामयी मदर (माता) बन गई। मदर टेरेसा द्वारा स्थापित चेरिटी संस्थायें आज लाखों असहाय बच्चों, वृद्धों तथा बीमारों की व्यापक रूप से सेवा कर रही हैं। अब्राहम लिंकन एक गरीब मोची के घर अमेरिका में पैदा हुए थे। प्रभु की इच्छा और आज्ञा को पहचान कर जीवन में भारी असफलताओं तथा कष्टों का सामना करते हुए अमेरिका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति बने। उन्होंने सारे विश्व से गोरे-काले का भेद मिटा दिया। अब्राहम लिंकन की मानवीय विचारों की आंधी में विश्व से अनेक राजाओं के राज्य खत्म हो गये तथा उसके स्थान पर उन्होंने जनतंत्र अर्थात् जनता का राज्य, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए स्थापित किया। उन्होंने समाज की भलाई के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। अब्राहम लिंकन को आज भी सारा विश्व बड़े ही सम्मान तथा आदर की दृष्टि से देखता है।परिवार तथा विद्यालय दोनों को मिलकर बच्चों को भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक शिक्षाओं का संतुलित ज्ञान कराना चाहिए। बच्चों को यह बतलाये कि ईश्वर एक है, धर्म एक है तथा मानव जाति एक है। इसके साथ ही हमें बच्चों को बाल्यावस्था से ही यह संकल्प कराना चाहिए कि एक दिन दुनियाँ एक करूँगा, धरती स्वर्ग बनाऊँगा। विश्व शान्ति का सपना एक दिन सच करके दिखलाऊँगा। परमात्मा की ओर से अवतरित पवित्र पुस्तकों गीता, त्रिपटक, बाईबिल, कुरान, गुरू ग्रन्थ साहिब, किताबे-अकदस का ज्ञान सारी मानव जाति के लिए हंै। यदि बच्चे बाल्यावस्था से ही सारे अवतारों की मुख्य शिक्षाओं को तथा महापुरूषों के प्रभु की राह में उठाये गये कष्टों से शिक्षा ग्रहण कर लें तो वे टोटल क्वालिटी पर्सन बन जायेंगे। इस नयी सदी में विश्व में एकता तथा शान्ति लाने के लिए आज के ज्ञान तथा बुद्धिमत्ता वाले टोटल क्वालिटी पर्सन (पूर्णतया गुणात्मक व्यक्ति) की आवश्यकता है।

पूरा समाज मेरा परिवार

स्कूल उनके गांव से करीब दस किलोमीटर दूर था। गांव में न सड़क थी, न बिजली। दूर-दूर तक कोई दुकान नहीं थी। गांव में सिर्फ 30 घर थे। कल्याणसुंदरम गांव के अकेले बच्चे थे, जिन्हें स्कूल जाने का मौका मिला। इसके लिए रोज दस किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था।
यह कहानी तमिलनाडु के एक छोटे गांव मेलाकारूवेलनगुलम की है। यह तिरूनेलवेली जिले में है। कल्याणसुंदरम इसी गांव में पले-बढ़े। एक साल थे जब उनके पिता की मौत हो गई। मां ने उन्हंे पाला। पति के निधन के बाद बेटे को पढ़ा-लिखाकर नेक इंसान बनाना उनके जीवन का एकमात्र मकसद बन गया। कल्याणसुंदरम बताते हैं, मुझे अकेले स्कूल जाना अच्छा नहीं लगता था। मैंने साथी बच्चों से पूछा, वे स्कूल क्यों नहीं जाते, तो जवाब मिला कि उनके परिवार के पास स्कूल की फीस देने के पैसे नहीं हैं। मैं इस बात से बहुत दुखी था। मैं उनकी मदद करना चाहता था, पर तब मैं बहुत छोटा था। गांव में बिजली नहीं थी, लिहाजा मां दीये की रोशनी में काम करती थीं। जब बेटा स्कूल जाने लगा, तो वह घर में लैंप ले आईं, ताकि बेटे को पढ़ाई में दिक्कत न हो। कल्याणसुंदरम बताते हैं, मां ने तीन बातें सिखाई। कभी लालच मत करो, अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान करो और हर दिन एक नेक काम करो। मां की बात मन में घर कर गई।
तब वह 16 साल के थे। उनकी आवाज लड़कियों जैसी पतली थी। दोस्त चिढ़ाने लगे। धीरे-धीरे वह हीन भावना के शिकार हो गए। आत्महत्या का ख्याल आने लगा। एक सुबह एक पत्रिका में उन्होंने प्रेरक लेख पढ़ा और लेखक से मिलने पहुंच गए। लेखक से उन्होंने कहा, मेरी आवाज लड़कियों जैसी है। सब चिढ़ाते हैं। मन करता है कि जान दे दूं। यह सुनकर लेखक महोदय मुस्कराए और कहा, इस बात की फिक्र मत करो कि तुम कैसा बोलते हो? कुछ ऐसा करो कि लोग मुम्हारे बारे में अच्छा बोलने लगे। यह सुनकर उनके मन की उदासी खत्म हो गई। स्कूली पढ़ाई के बाद वह शहर आ गए। स्नातक में तमिल भाषा को मुख्य विषय चुना, फिर इतिहास में एमए किया। शहर में भी मां की सीख याद रही। काॅलेज के दिनों से ही वह आस-पास के बच्चों की पढ़ाई में मदद करने लगे। बात 1962 की है। उन दिनों वह मद्रास यूनिवर्सिटी से लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई कर रहे थे। भारत-चीन के बीच युद्ध चल रहा था। कल्याणसुंदरम बताते हैं, मैंने रेडियो पर नेहरू जी का संदेश सुना। वह देशवासियों से रक्षाकोष में दान देने की अपील कर रहे थे। मैं तुरंत मुख्यमंत्री कामराज के पास गया और अपने गले से सोने की जंजीर उतारते हुए कहा- आप इसे कोष में जमा कर लीजिए। शायद यह सैनिकों के काम आ जाए। मुख्यमंत्री इतना प्रभावित हुए कि मई दिवस पर कल्याणसुंदरम को सम्मानित किया। पढ़ाई बाद यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन की नौकरी मिल गई। उनका जीवन सादा था। साधारण से घर में रहना, दो जोड़ी कपड़े में गुजारा, पैदल चलना और खुद पकाकर खाना। जरूरतें बहुत कम थीं, लिहाजा वेतन का कुछ ही हिस्सा खर्च कर पाते थे। बाकी पैसे बच्चों के लिए दान करने लगे। बाद में मदद करने का जुनून इस कदर चढ़ा कि वह पूरा वेतन दान करने लगे। नौकरी के पूरे 35 साल यह सिलसिला चला। कल्याणसुंदरम कहते हैं, वेतन के पैसे से गरीब बच्चों को स्कूल जाता देखकर मन को बड़ा सुकून मिलता था। यह वाकया 1990 का है। उन्हें यूजीसी से एक लाख रूपया एरियर मिला। उन्होंने सोचा, इस पैसे का मैं क्या करूंगा? वह डीएम कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी को पूरी राशि देते हुए कहा कि आप इसे अनाथ बच्चों के कल्याण पर खर्च कीजिए। डीएम के जरिये यह बात मीडिया तक पहुंची। पहली बार पूरे शहर को इस दानवीर के बारे मंे पता चला। यह खबर सुपरस्टार रजनीकांत तक भी पहुंची। वह उनसे मिलने पहंुचे। अभिनेता ने उन्हें बतौर पिता गोद लेने का एलान किया। वह कल्याणसुंदरम को अपने साथ घर ले जाना चाहते थे, पर वह राजी नहीं हुए। साल 1998 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पालम नाम की संस्था बनाई। पीएम के दस लाख रूपये संस्था को दान कर दिए। हर महीने की पेंशन भी दान में जाने लगी। खुद के गुजारे के लिए वह होटल में वेटर का काम करने लगे। कल्याणसुंदरम कहते हैं, मैंने शादी नहीं की। मेरी जरूरतें बहुत कम हैं। अपने गुजारे के लिए मैं होटल में काम करता हूं। मेरा खर्च निकल जाता है। मुझे पेंशन की जरूरत नहीं है। वह अपनी सारी पैतृक संपत्ति सामाजिक संस्था को दान कर चुके हैं। उन्होंने मरने के बाद अपनी आंखें और शरीर दान देने का एलान भी किया है। संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें 20वीं सदी के बेमिसाल लोगों में शुमार किया। एक अमेरिकी संस्था ने उन्हें ‘मैन आॅफ द मिलेनियम’ अवाॅर्ड से सम्मानित किया। इस मौके पर उन्हें बतौर इनाम 30 करोड़ रूपये मिले। यह पैसा भी उन्होंने दान कर दिया। कल्याणसुंदरम कहते हैं, इस दुनिया में हर इंसान मृत्यु के बाद खाली हाथ जाता है। फिर संपत्ति जोड़ने की होड़ कैसी? दूसरों के लिए जियो, बड़ा सुकून मिलेगा।
प्रस्तुति – मीना त्रिवेदी
साभार – हिन्दुस्तान दिनांक 7 मई 2017