Daily Archives: July 6, 2017

बच्चों में गणित और अंग्रेजी के डर को दूर करना होगा

–आठवीं कक्षा तक रूचिकर शिक्षण किट दिए जाएंगे
रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि बच्चों में अंग्रेजी और गणित के डर को भगाना होगा। यह तभी संभव होगा, जब इन दोनों विषयों को रूचिकर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि स्कूल शिक्षा विभाग, सम्पर्क फाउंडेशन की मदद से गणित और अंग्रेजी के लिए रोचक शिक्षण सामाग्री तैयार की गई है। जब बच्चे खेल-खेल में गणित और अंग्रेजी पढ़ेंगे, तो उनमें शिक्षा के प्रति रूचि और आत्मविश्वास बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह आज यहां नवीन विश्राम गृह में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत सम्पर्क स्मार्ट शाला के अनावरण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इसके अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्पर्क फाउंडेशन की मदद से तैयार किए गए अंग्रेजी के शिक्षण सामाग्री को राज्य के 33 हजार प्राथमिक शालाओं में वितरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले दो वर्षों से प्रदेश भर में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाया जा रहा है। सभी की भागीदारी से इस अभियान को अच्छी सफलता मिल रही है। इस अभियान में सम्पर्क फाउंडेशन का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में किसी भी निजी स्कूल की तुलना में संसाधन ज्यादा हैं। मेरिट में भी सरकारी स्कूल के बच्चे आगे रहते हैं। कोचिंग में लोग लाखों रूपए खर्च करते हैं, लेकिन आईआईटी, एनआईटी, पीईटी और पीएमटी में सबसे ज्यादा बच्चे सरकारी स्कूल और प्रयास विद्यालय के बच्चे चयनित होते हैं। इसलिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने बलरामपुर कलेक्टर द्वारा अपनी बच्ची का सरकारी स्कूल में दाखिला कराए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह दूसरे लोगों के लिए भी अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी पहली से तीसरी तक के बच्चों को सम्पर्क किट दिए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में आठवीं तक के बच्चों को इस तरह के रूचिकर शिक्षण सामाग्री प्रदान की जाएगी।

निर्धारित कोर्ट डे में अनिवार्य रूप से सुनवाई करें

रायपुर। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा है कि संभाग के सभी राजस्व अधिकारी अपने निर्धारित कोर्ट के दिवस पर अनिवार्य रूप से सुनवाई करें ताकि लंबित प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित हो सके और लोगों को इसके लिए बार-बार न आना पड़े। कोर्ट-डे का प्रचार-प्रसार भी किया जाए। श्री पाण्डेय गुरुवार को यहां जिला कलेक्टोरेट के कृषि कार्यालय के सभाकक्ष में रायपुर संभाग के राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान उपरोक्त निर्देश अधिकारियों को दिए है। श्री पाण्डेय ने जिलेवार लंबित राजस्व प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की और उनका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती रेणु पिल्लै, संभागायुक्त ब्रजेशचंद मिश्र, संचालक भू-अभिलेख रमेश शर्मा सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर और अन्य राजस्व अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। राजस्व मंत्री पाण्डेय ने राजस्व प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजस्व अधिकारी अपने निर्धारित कोर्ट-डे पर अनिवार्य रूप से बैठें। इस दौरान कोई जरूरी काम होने पर किसी अन्य राजस्व अधिकारी को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट दिवस की जानकारी भी पक्षकार और वकीलों को दी जाए ताकि उस दिन वे नियत समय पर मौजूद रहें।

धोखाधड़ी के आरोपी CE से स्पष्टीकरण तक नहीं मांग पा रहे ENC

—जल संसाधन विभाग में ‘प्रभावशाली’ के दबाव में सहमे अफसर
रायपुर। सर्वेश्वर एनीकट प्रकरण में धोखाधड़ी करने के आरोपी मुख्य अभियंता आरएन दिव्य के मामले में जल संसाधन विभाग के अफसर ‘प्रभावशाली’ व्यक्ति के दबाव में सहमे हैं। वह ‘प्रभावशाली’ व्यक्ति कौन है, कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है। उसका दबाव इतना है कि प्रमुख अभियंता के नाम पर बनाई गई प्रेस रिलीज को मुख्य अभियंता ने खुद हस्ताक्षर बनाकर जारी कर दिया। इस मामले में अब प्रमुख अभियंता से स्पष्टीकरण तक नहीं मांग पा रहे हैं। यह मुख्य अभियंता वही है जिसके ऊपर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप है और ईओडब्ल्यू ने प्रकरण दर्ज किया है। गौरतलब है कि मिनीमाता हंसदेव बांगो परियोजना के मुख्य अभियंता आरएन दिव्य, अधीक्षण अभियंता बीआर लाड़िया और कार्यपालन अभियंता मधुकर कुंभारे के विरुद्ध ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। इन तीनो अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग करते हुए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप है। इस केस के दर्ज होने का मामला समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद 3 जुलाई 2017 को जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता के नाम ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज किए गए केस में लगे आरोपों को झुठलाते हुए सफाई देने की प्रेस रिलीज तैयार की गई। प्रमुख अभियंता एच सी कुटारे का कहना है कि रिलीज के तैयार कराये जानकारी उन्हें नहीं है। उस दिन वह मंत्रालय गये हुए थे। इधर उनके कार्यालय से भ्रष्टाचार के आरोपी मुख्य अभियंता आरएन दिव्य ने ही हस्ताक्षर कर रिलीज जारी कर दिया। आरएन दिव्य का कहना है कि ऐसा उन्होंने ‘मंत्री’ के कहने पर किया। वह मंत्री कौन है वह नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं। मुख्य अभियंता द्वारा किए गए इस दुस्साहस के मामले में अब प्रमुख अभियंता स्पष्टीकरण तक नहीं मांग पा रहे हैं। गुरुवार को उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। शायद उन्हें अखबार वालों से बात करने से भी रोक दिया गया है।

अचल जोती ने नए मुख्य चुनाव आयुक्त

नई दिल्ली। अचल कुमार जोती ने गुरुवार को देश के 21वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाल लिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता पर काम करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई मतदाता पीछे न छूटे मिशन उनकी प्राथमिकता में बना रहेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि खास तौर पर लोकसभा और राज्यसभा चुनावों के लिये ई-गवर्नेस को सक्रिय रूप से बढ़ावा भी दिया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब 64 वर्षीय जोती वहां के मुख्य सचिव थे। उन्होंने नसीम जैदी की जगह ली है जिनका मुख्य चुनाव आयुक्त पद का कार्यभार कल खत्म हो गया। जोती भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1975 बैच के अधिकारी है। वह 8 मई 2015 को चुनाव आयुक्त के तौर पर तीन सदस्यों वाले पैनल का हिस्सा बने थे और अगले साल जनवरी तक इस पद पर रहेंगे। वह जनवरी 2013 में गुजरात के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुये थे। एक मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त छह वर्ष के तय कार्यकाल या 65 वर्ष की उम्र जो भी पहले पूरी हो, तक पद पर रहता है। जोती ने गुजरात के सतर्कता आयुक्त समेत राज्य में कई दूसरे अहम पदों पर काम किया है। वह 1999 से 2004 के बीच कांडला पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भी रहे। जैदी के सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हुये निर्वाचन आयुक्त के एक पद को सरकार द्वारा जल्द ही भरने की उम्मीद है। ओम प्रकाश रावत अभी आयोग में दूसरे निर्वाचन आयुक्त है।

 

क्यों लिया जाये एयरटेल का इंटरनेट टीवी

इंटरनेट हमारे कंटेट उपयोग करने के तरीके को बदल रहा है। खासकर डेटा के बडे बंडल के साथ किफायती हाईस्पीड ब्राडबैंड प्लान्स आॅनलाइन होते हुए कई उपकरणों पर घरों में कंटेट लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। घर पर आॅनलाइन सिनेमा का अनुभव निर्मित हो रहा है। भारत में पहली बार 360डिग्री होम एंटरटेनमेंट एक्सपीरियंस प्रदान करने के लिए 500 से अधिक टीवी चैनलों के साथ सर्वोत्तम अनुभव प्राप्त कर सकते है। टीवी पर सर्वश्रेष्ठ आॅनलाइन कंटेट लाकर भारत के पहले एण्ड्राइड पावर्ड हाइब्रिड सेटअप बॉक्स के साथ एयरटेल टीवी ने मैदान मार लिया है। इससे एक साथ कई उपकरणों तथा रिमोट के साथ काम करने की समस्या समाप्त हो गई है तथा यह निर्बाध रूप से सभी काम बडी आसानी से करता है। ऐसे पांच कारण हैं जिनके चलते आपको अपनी अगली खरीदी में इसे शामिल करने के लिए सोचना चाहिए।

किसी भी टीवी को स्मार्ट टीवी बना देता है
इसकी मदद से आपका मौजूदा टीवी पहले से ज्यादा बेहतर तथा स्मार्ट बन जाता है। आपके टीवी का मॉडल चाहे जो भी हो या उसके स्क्रीन की साइज चाहे जितनी भी क्यों न हो एयरटेल इंटरनेट टीवी उसपर आनलाइन कंटेट प्रदान करता है। आप अपने मौजूदा टीवी पर नेटफ्लिक्स, यू टयुब वीडियो, एयरटेल मूव्हीज, गूगल प्ले तथा गूगल म्युजिक कंटेट लाइब्रेरियज का आनंद उठाएं। अब आपको स्मार्ट टीवी खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही आपको मिलता है अपने सैटेलाईट टीवी चैनलों का कोटा जिससे आपको ऐसे नियमित शो देखने से भी वंचित नहीं होना पडता है जो आनलाइन नहीं हैं।

आपकी तमाम आवश्यकताओं के लिए एक ही उपकरण
आपको सैटेलाइट चैनलों, म्युजिक, वीडियोज, गेमिंग या किसी भी अन्य चीज के लिए अन्य किसी उपकरण की जरूरत नहीं है। इन-होम मनोरंजन के अनुभव को पुन:परिभाषित करने वाला इंटरनेट टीवी दो दुनियाओं – लिनियर टीवी चैनल्स तथा इंटरनेट के सर्वश्रेष्ठ कंटेटस को आपके टीवी को असीमित वीडियोज, गेम्स, म्युजिक, एप्स तथा 500 से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल्स के साथ एंटरटेनमेट का पावर हाउस बना देता है। इंटरनेट टीवी बिल्ट-इन र्क्रोमकास्ट के साथ आता है जो आपके टीवी स्क्रीन पर आपके स्मार्टफोन के हजारो एप्स की सामग्री प्रदान करता है। यह सब एक सरल यूजर इंटरफेस में परिवर्तित किया गया है जो आपको बेतरतीब फैले वायरों के जाल से मुक्ति दिलाकर केवल एक रिमोट और साफ क्लटर फ्री केबलिंग अथवा वायरों के बदले एक केबल से सारा काम आसान कर देता है। यदि आपके पास 4जी रेडी टीवी है जिसे 4जी कंटेट का इंतजार है तो एयरटेल इंटरनेट यह काम बडी अच्छी तरह कर देगा। यदि आप टीवी देखने का शानदार और अलग अनुभव करते हैं तो इसके लिए 4जी कंटेट को इस पर स्ट्रीम करें।

वॉइस सर्च के साथ इनोवेटिव रिमोट
इसमें भारत का पहला एसटीबी एंड टीवी रिमोट है जो ब्लूटूथ इनेबल्ड है तथा गूगल वाइस सर्च फीचर्स के साथ एकीकृत है। इससे आॅफलाइन और आनलाइन कंटेट को खोजना आसान तथा सरल हो गया है। अब आपको चैनल नम्बर याद रखने की कोई जरूरत नहीं है बस रिमोट में नाम बोलिए और अपने टीवी स्क्रीन पर उसे पाइए ! एयरटेल ने एयरटेल इंटरनेट टीवी के लिए खासकर मोबाइल फोन्स के लिए गेमपेड एप्लिकेषन भी लाचं किया है जिसकी मदद से आप अपने मोबाइल फोन को टीवी रिमोट और गेम कंट्रोलर के रूप में इस्तेमाल कर सकते है।

बेजोड कीमत
3 महिने के सब्सक्रिप्शन के साथ इसकी कीमत केवल रूपए 4999 है तथा 12 महिने के फ्री डीटीएच के साथ इसकी कीमत रूपए 7999 है। मौजूदा एयरटेल डीटीएच यूजर्स 3 माह के फ्री सब्सक्रिप्षन के साथ इसे केवल रूपए 3999 में अपग्रेड कर सकते हैं। जिन एयरटेल ब्राडबैंड ग्राहकों के पास रूपए 999़ प्रतिमाह का प्लान है वह इंटरनेट टीवी पर 25 जीबी का अतिरिक्त डेटा कोटे का आनंद ले सकते हैं। जिनका रेंटल प्लान रूपए 999 प्रतिमाह से कम है उन्हें 10 जीबी का अतिरिक्त डेटा मिलेगा। फ्री सब्सक्रिप्शन के बाद एयरटेल ब्राडबैंड ग्राहक हर माह इंटरनेट टीवी रिचार्ज पर 10 प्रतिशत कैशबैक का फायदा भी उठा सकते हैं।

 

… तो इसलिए आदिवासी नहीं है अजीत जोगी

अजीत जोगी क्यों नहीं हैं आदिवासी: ख़ास बिंदु

1.अजीत जोगी को जांच समिति ने जवाब देने के दो मौक़े दिए. पहली बार 20/02/15 को समिति ने अजीत जोगी को प्रश्नावली भेजी जिसका जवाब उन्होंने 22/03/15 को अपना उत्तर दिया. फिर समिति ने उन्हें अपने पक्ष में सबूत पेश करने का पूरा मौक़ा दिया और 15.05.17 को उन्होंने अपने वकील राहुल त्यागी के साथ समिति के समक्ष उपस्थित होकर सभी दस्तावेज़, सबूत और साक्ष्य प्रस्तुत किए.

2.जांच समिति ने अपनी जांच में पाया कि ग्राम सारबहरा में अजीत जोगी के पिता केपी जोगी (पिता दुलारे जोगी) के नाम से 10 प्लॉट में 22 एकड़ ज़मीन थी. लेकिन दस्तावेज़ों में जाति अंकित नहीं है.

3.ग्राम जोगीसार, जिसे अजीत जोगी अपना पैतृक गांव मानते हैं, वहां उनके पिता केपी जोगी अथवा उनके पूर्वजों का नाम किसी भी भू-अभिलेख में दर्ज नहीं है.

4.अजीत जोगी ने जांच समिति के समक्ष अपने पिता के नाम पर कथित रूप से दर्ज एक भू-भाग का दस्तावेज़ पेश किया, इसमें उनके पिता की जाति कंवर लिखी हुई है. लेकिन समिति ने जांच में पाया कि सारबहरा, जोगीडोंगरी के इस दस्तावेज़ का अधिकार अभिलेख तहसीलदार पेंड्रारोड के कानूनगो शाखा में उपलब्ध नहीं है. जो खसरा-रकबा अजीत जोगी ने बताया उस ज़मीन का ब्यौरा ज़िला मुख्यालय में भी दर्ज नहीं है.

5. समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ग्राम तालापारा, तहसील व ज़िला बिलासपुर में खसरा नंबर 144/1 में 1.10 एकड़ ज़मीन उनके पिता केपी जोगी के नाम थी, जो उनकी मौत के बाद विरासत हक़ से अजीत जोगी व अनके भाइयों को मिली. यह ज़मीन 1928-29 के मिसल अभिलेख में अंजोरी चमार मौरूसी के नाम से दर्ज पाई गई.

6. समिति ने कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि अजीत जोगी के पूर्वज जरहाभाठा, बिलासपुर के मूल निवासी थे और सारबहरा पेंड्रारोड में उनके पिता ने ज़मीन शिक्षक की नौकरी करते हुए बाद में ख़रीदी.

7. अजीत जोगी ने ग्राम जोगीसार के सीताराम (छोटू) (मूड़ी कंवर) को अपना पूर्वज बताया है. लेकिन जांच समिति ने वंशावली की जांच की तो पाया कि ऐसा कोई सबूत दस्तावेज़ों में नहीं है.

8. समिति ने अजीत जोगी की वंशावली के बारे में पाया कि जो बयान अजीत जोगी ने दर्ज करवाए उनके दस्तावेज़ी सबूत नहीं मिलते. समिति ने कहा है कि अजीत जोगी के दादा दुलरवा/दुलारे के भाई बहनों का कोई ज़िक्र नहीं मिलता जबकि अजीत जोगी अपनी वंशावली में इसका उल्लेख करते हैं.

9. समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अजीत जोगी, उनकी बहन और अन्य रिश्तेदारों के शाला अभिलेखों में जाति के सामने ईसाई दर्ज है. अजीत जोगी स्वयं जिस स्कूल में पहली से चौथी कक्षा तक पढ़े वहां भी उनकी जाति के सामने ‘ई’ लिखा हुआ है. समिति ने अपनी जांच में स्पष्ट रूप से पाया कि स्कूल के दाखिल-खारिज रजिस्टर में अजीत जोगी के सभी भाई बहनों की जाति ईसाई बताई गई है जबकि अन्य बच्चों की जाति में गोंड, राजगोंड, अहीर, मेहत्तर, भैना, फूलमाली आदि दर्ज है.

10. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अजीत जोगी के पूर्वज आज़ादी से पहले ही ईसाई धर्म अपना चुके थे. सबूत के रूप में समिति ने अजीत जोगी की बुआ सूरजमणी (पिता दुलारू) के हायर सेकेंड्री में दाखिले का ज़िक्र करते हुए कहा है कि उनकी जाति भी ईसाई दर्ज की गई.

11. अजीत जोगी के पूर्वजों द्वारा ज़मीनों की ख़रीदी बिक्री का ज़िक्र करते हुए कहा है कि किसी भी दस्तावेज़ में अजीत जोगी के पूर्वजों ने अपने आपको आदिवासी नहीं कहा है.

12. समिति ने जांच में पाया कि 1965 में हीरालाल राजगोंड ने अपनी ज़मीन अजीत जोगी के पिता केपी जोगी को बेचने के लिए कलेक्टर बिलासपुर अनुमति ली और इस ज़मीन का सौदा 1967 में हुआ.

13. वहीं अजीत जोगी के पिता केपी जोगी ने 1967 में ही अपनी ज़मीन गोविंद प्रसाद राय को बेची तो इसके लिए कलेक्टर से अनुमति नहीं ली गई.

14. अजीत जोगी की माता श्रीमती कांतामनी जोगी ने अपने हक़ की ज़मीन शिवशंकर मिश्रा को 1979 में बेची. समिति को इस क्रय-विक्रय के संबंध में भी कलेक्टर से अनुमति लिए जाने का कोई दस्तावेज़ नहीं मिला. समिति का कहना है कि यदि अजीत जोगी के पिता या माता यदि आदिवासी होते तो उन्हें अपनी ज़मीन किसी ग़ैर-आदिवासी को बेचने के लिए कलेक्टर से अनुमति लेने की ज़रूरत होती. जबकि ऐसा नहीं किया गया.

15. रिपोर्ट में कहा गया है कि अजीत जोगी ने अपनी जाति साबित करने के लिए बपतिस्मा रजिस्टर पेश किया है जिसमें उनके दादा दुलारे के नाम के आगे जाति में कंवर लिखा हुआ है. लेकिन समिति ने कहा है कि एक तो मेंबरशिप रजिस्टर किस चर्च का है, यह पता नहीं चलता, दूसरे विभिन्न प्रविष्ठियों के हस्ताक्षर मेल नहीं खाते और तीसरे धार्मिक दस्तावेज़ कई साल बाद अजीत जोगी के पास कैसे हैं इसका जवाब नहीं मिलता.

16. समिति ने कहा है कि उसने अजीत जोगी और अध्यक्ष, डिसाइपल्स ऑफ़ क्राइस्ट चर्च ज्योतिपुर को रजिस्टर की मूल प्रति जमा करने को कहा है जिससे कि इसकी फ़ोरेंसिक जांच करवाई जा सके. लेकिन अजीत जोगी ने सिर्फ़ फ़ोटोकॉपी जमा की है. समिति ने कहा है वह निजी दस्तावेज की छाया प्रति को सबूत के रूप में स्वीकार नहीं करती.

17. समिति ने ग्राम पंचायत सारबहरा की बैठक के रजिस्टर के बारे में कहा है कि ग्राम सभा को अधिकार है कि वह जाति के उन मामलों का फैसला करे जिसमें पर्याप्त दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं लेकिन जिस कार्रवाई का ज़िक्र अजीत जोगी ने किया है वह ग्राम सभा की कार्रवाई नहीं मानी जा सकती. समिति ने कहा है कि इस बैठक में उपस्थित लोगों की संख्या का ज़िक्र नहीं है जो ग्राम सभा की बैठक के लिए ज़रूरी है.

18. इस मामले में जनसुनवाई का ज़िक्र करते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जितने लोगों ने भी बयान दिए उन्होंने सुनी सुनाई बातों का ज़िक्र किया है जिसे कमज़ोर प्रकार का साक्ष्य समझा जाता है. समिति ने कहा है, ‘साधारण सिद्धांत यह है कि अनुश्रुत साक्ष्य सुसंगत और ग्राह्य नहीं है.’

19. अजीत जोगी की सामाजिक स्थिति के बारे में समिति ने कहा है कि अजीत जोगी के सभी सगे संबंधी ईसाई धर्म के हैं और वे जन्म, विवाह और मृत्यु संबंधी संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार संपन्न करते हैं न कि आदिवासी परंपराओं को अनुसार. समिति ने अजीत जोगी के बड़े भाई के बयान का ज़िक्र किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि कोई ईसाई धर्म स्वीकार कर लेता है तो उसी दिन उसकी जाति समाप्त हो जाती है.

20. समिति ने कहा है कि किसी भी कंवर जाति के लड़के लड़कियों का विवाह जोगी परिवार में तथा जोगी परिवार के लड़के लड़कियों का विवाह कंवर जाति में नहीं हुआ है. अत: उनकी सामाजिक प्रास्थिति अध्ययन के अनुसार उन्हें कंवर जाति का नहीं माना जा सकता.

इन बिंदुओं के आधार पर समिति ने कहा है कि अजीत जोगी को अनुसूचित जनजाति के आरक्षित पद हेतु प्राप्त होने वाले संवैधानिक लाभ की पात्रता नहीं है.