माओवादियों के संपर्क में थीं नंदिनी सुंदर और बेला भाटिया

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा में बीते 24 अप्रैल को हुए नक्सली हमले और 2010 में ताड़मेटला हत्यकांड में शामिल एक सक्रिय माओवादी ने कथित रूप से यह बात मानी है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रफेसर नंदिनी सुंदर और अधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया उसके जरिए बड़े माओवादी नेताओं के संपर्क में थीं। माओवादी पोडियम पांडा ने पुलिस के आगे ‘सरेंडर’ करने के बाद यह बात कही। यहां रायपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पांडा ने कहा कि वह दक्षिण बस्तर में सीनियर माओवादियों और नंदिनी सुंदर व बेला भाटिया के बीच एकमात्र लिंक था। पांडा ने बताया कि वह ऐक्टिविस्ट्स को दिल्ली से मोटर बाइक पर सुकमा के घने जंगलों में माओवादियों से मीटिंग कराने ले जाता था। इन ऐक्टिविस्ट्स में सुंदर और भाटिया भी शामिल थीं। जिन माओवादियों से मुलाकात कराई जाती थी, उनमें रमन्ना, हिडमा, पपाराव आयतु, अर्जुन और अन्य शामिल थे। पांडा ने बताया कि वह उनके लिए संदेशवाहक का भी काम करता था।
नंदिनी ने दावे को झूठा बताया
इस खबर को लेकर जब नंदिनी सुंदर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, यह झूठ है और पुलिस कस्टडी में बलपूर्वक बुलवाया गया है। वहीं पांडा की पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपनी बंदी-प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया है कि बीते 3 मई को पांडा को सीआरपीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा जबर्दस्ती कैद किया गया।
एसपी अभिषेक मीणा ने की पुष्टि
सुकमा के एसपी अभिषेक मीणा ने बताया, माओवादी पोडियम पांडा माओवादियों के अंदर के कैडर और दिल्ली, रायपुर व अन्य शहरों के नेटवर्क सिस्टम के बीच बतौर लिंक काम कर रहा था। वह कई लड़ाइयों में भी शामिल रहा। पुलिस को दिए बयान में उसने माना, कि वह बुरकापाल घटना में शामिल था और सीआरपीएफ के जवानों पर इनसास राइफल से हमला किया था। पांडा 2010 के ताड़मेटला हत्याकांड में भी शामिल था जिसमें 75 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गई थी।

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