छह माह से मजूदरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हमाल

–श्रमायुक्त कार्यालय से दोषी ठेकेदार को मिल रहा संरक्षण
रायपुर। सेन्ट्रल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन में अनलोड़िंग व स्केटिंग का कार्य कर रहे हमाल पिछले छह माह से मजदूरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। इन हमालों को उनका पारिश्रमिक दिलाने के बजाय श्रमायुक्त कार्यालय द्वारा दोषी ठेकेदार को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस कारण से हमालों की 15 लाख 72 हजार 633 रुपये की मजदूरी फंस गयी है। छत्तीसगढ़ हमाल मजदूर संघ के कार्यकारिणी के सदस्य सियाराम साहू ने मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में कहा है कि 6 जनवरी से 10 जुलाई 2017 तक करीब 100 मजदूरों की मजदूरी नहीं दी गई है। राईस मिलर्स राधाकिशन अग्रवाल सहित 14 राईस मिलर्स से यह पैसा बकाया है। दो राईस मिलरों ने श्रमिकों की मजदूरी का पैसा चेक के माध्यम से सहायक श्रमायुक्त कार्यालय रायपुर में मजदूरों को भुगतान किये जाने के लिए भेजा था किन्तु ठकेदार के दबाव के चलते श्रमायुक्त कार्यालय ने हमालों की मजदूरी देने के बजाय चेक को पुन: राईस मिलरों को वापस कर दिया। संघ ने यह भी कहा है कि राज्य के किसी और जिले में राईस मिलर्स के काम का ठेका नहीं दिया जाता। अनलोडिंग करने वाले हमालों को सीधे राईस मिलर द्वारा मजदूरी का भुगतान किया जाता है। किन्तु यहां ठेकेदार से काम लिया जा रहा है जो पूरी तरह से अवैधानिक है। हमाल मजदूर संघ की शिकायत पर केन्द्रीय भंडार निगम ने भी स्पष्ट किया है कि हैंडलिंगÑ टांसपोर्टिंग और ट्रांजेक्शन में केन्द्रीय भंडार निगम की कोई भूमिका नहीं है। निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएस मीना ने 31 मई 2017 को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय को पत्र भेजकर इस संबंध में स्पष्ट किया है।

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