Category Archives: आर्थिक

चीन-अमेरिका के बीच छिड़ सकता है व्यापार युद्ध : जैक मा

बीजिंग। ई-वाणिज्य कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा ने कहा है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच विवादों का उपयुक्त तरीके से समाधान नहीं किया गया तो ट्रंप प्रशासन के अंतर्गत ‘बड़े व्यापार युद्ध’ की आशंका है। उन्होंने कहा कि चीन का आर्थिक परिदृश्य उम्मीद के मुकाबले कहीं अधिक कड़ा होगा जिसकी वजह चीनी अर्थव्यवस्था में निरंतर नरमी है। जनरल एसोसिएशन आॅफ झेजिआंग इंटरप्रेन्योर की सालाना बैठक को संबोधित करते हुए जैक मा ने कहा, अगले तीन से पांच साल में उम्मीद के मुकाबले आर्थिक स्थिति अधिक कठिन होगी। उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि का जिक्र किया। यह दो दशक में सबसे कम वृद्धि दर है। उन्होंने कहा कि यह स्वभाविक है कि चीन की तीव्र आर्थिक वृद्धि दर पिछले तीन दशक में तीव्र रही है और यह हमेश बनी नहीं रह सकती और अब जोर वृद्धि की गुणवत्ता पर स्थानांरित हो गया है।

नोटबंदी सैद्धान्तिक रूप से अच्छा कदम : जालान

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने कहा कि सैद्धान्तिक रूप से देखा जाए तो नोटबंदी कालाधन समाप्त करने के लिए एक अच्छा कदम था लेकिन यदि नतीजों के हिसाब से देखा जाए, तो यह अच्छा साबित नहीं हुआ. एनसीएईआर के एक कार्यक्रम में जालान ने कहा, ‘सैद्धान्तिक रूप से नोटबंदी अच्छी थी, किसी को कालेधन को पकड़े जाने पर आपत्ति नहीं है. लेकिन यदि आप नतीजों को देखें तो आप देख सकते हैं यह कदम सही साबित नहीं हुआ.’ उन्होंने कहा कि यदि इसने ठीक काम नहीं किया है तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इसके स्थान पर क्या कर सकते हैं जो सही साबित हो. बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने नोटबंदी को ‘एक रचनात्मक विध्वंस’ बताया था. उन्होंने इसकी तुलना 1991 के सुधारों से की. उन्होंने कहा कि यह 1991 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा ‘उलटफेर पैदा करने वाला नीतिगत नवप्रवर्तन’ है. इससे कालाधन को नष्ट करने में मदद मिली है. वहीं, नोबेल प्राइज़ विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन नोट बंदी जैसे निर्णय से खुश नहीं दिखे थे. एक अंग्रेजी अखबार के साथ साक्षात्कार में प्रोफेसर सेन ने सरकार के नोट बंदी के इरादे और अमल पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था यह “निरंकुश कार्रवाई” जैसी है और सरकार की “अधिनायकवाद प्रकृति” का खुलासा करती है.